पिता जी से मिली जरूरतमंदों की मदद करने की सीख

लखीमपुर:पितासेमिलीसीखआपजीवनमेंजोकुछभीचाहतेहैंवहप्राप्तकरसकतेहैंबसआपदूसरेलोगोंकीमददकरनाशुरूकरदें।मुख्यसिग्नलइंस्पेक्टररेलवेलखीमपुरकेपदपरकार्यकरचुकेमानवताकेसजगप्रहरीमेरेपितासूर्यनारायनत्रिपाठीनेअपनेजीवनकालमेंअनेकबेरोजगारयुवकोंकोरोजगारउपलब्धकराया।वेजबभीगांवजायाकरतेथेवहांसेबेरोजगारनवयुवकोंकोलेकरलखीमपुरआतेथेऔरउन्हेंविभिन्नविभागोंमेंभर्तीकरानेकाप्रयासकरतेथेयहांतककिउनकीट्रेनिगकेसमयभीउनकीआर्थिकसहायताकरतेथे।अपनेविभागीयकर्मचारियोंकीभीसमय-समयपरयथोचितमददकियाकरतेथे।जनमानसकीसेवाएंउनकेजीवनकीप्राथमिकताथीऔरजीवनपर्यंतनरसेवानारायणसेवाकीभावनासेओतप्रोतहोकरअंतिमसांसतकसमाजकीसेवामेंलगेरहे।अपनेमाता-पिताकीसेवाओंकामेरेऊपरगहराप्रभावपड़ाऔरउनकेपदचिन्होंपरचलतेहुएउनकीस्मृतिमेंमैंनेसूर्यनारायनचैरिटेबलफाउंडेशनकागठनकियाजोआजअनेकानेकरोगियोंकेलिएवरदानसाबितहोरहाहै।निर्धनगरीबएवंअसहायलोगोंकीमददकेलिएयहसंस्थासदैवतत्परहै।पिताजीकेआशीर्वादसेआजयहसंस्थाअनेकोंकाजीवनबचानेकाप्रयासकररहीहै।

डॉ.बीपीत्रिपाठी

सीनियरमेडिकलऑफिसर

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